शुक्रवार को जो सुनवाई होने वाली थी उसमें मोहम्मद 11 सितंबर 2001 के विमान हमलों में अपनी भूमिका का अपराध स्वीकार करने वाले थे.
यह हमला तब हुआ था जब अपहरणकर्ताओं ने एक यात्री विमान पर कब्ज़ा कर लिया था और न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर और वॉशिंगटन में पेंटागन के बाहर क्रैश करा दिया था.
वहीं यात्रियों के प्रतिरोध करने के बाद एक अन्य विमान (जिसका अपहरण किया गया था) पेनसिल्वेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.
मोहम्मद ख़ालिद पर लगे कई आरोपों में साज़िश और हत्या का आरोप भी शामिल है और उनकी चार्जशीट में 2,976 पीड़ितों के नाम दर्ज हैं.
मोहम्मद ख़ालिद ने पहले दिए अपने बयान में कहा था कि उन्होंने ही 9/11 हमले की शुरू से लेकर अंत तक पूरी योजना बनाई थी.
यानी, 1990 के दशक के मध्य में, इमारत से भिड़ाने के लिए कमर्शियल विमानों को उड़ाने की पायलटों को ट्रेनिंग देने का आइडिया बनाने और इन योजनाओं को ओसामा बिन लादेन तक ले जाने तक की ज़िम्मेदारी उनकी थी.
शुक्रवार की सुनवाई ग्वांतानामो बे बेस पर स्थित अदालत के एक कमरे में होनी थी. इसमें 9/11 में मारे गए लोगों के परिवार के सदस्यों और मीडिया के लोग भी मौजूद रहने वाले थे.
ग्वांतानामो बे बेस पर स्थित सैन्य अदालत में हुई प्री-ट्रायल सुनवाई लगभग एक दशक से भी लंबे समय से जारी है.
लेकिन मोहम्मद ख़ालिद और दूसरे अरोपियों को अमेरिकी हिरासत में रहते हुए दी गई यातनाओं से सबूतों पर होने वाले असर के सवाल ने कार्यवाही को और जटिल बना दिया है.
साल 2003 में पाकिस्तान में गिरफ़्तारी के बाद मोहम्मद को तीन सालों तक सीआईए की गुप्त जेलों में रहना पड़ा, जिन्हें ‘ब्लैक साइट्स’ के नाम से जाना जाता है. यहां उन्हें 183 बार वॉटरबोर्डिंग यानी पानी में डुबाने का सामना भी करना पड़ा.
इसके साथ ही उन्हें कथित तौर पर पूछताछ के ‘दूसरे आधुनिक तरीक़ों’ का सामना करना पड़ा, जैसे सोने न देना और जबरन निर्वस्त्र रहने पर मजबूर करना.
‘लीस्ट वर्स्ट प्लेस: हाउ ग्वांतानामो बिकेम द वर्ल्ड्स मोस्ट नॉटोरियस प्रिज़न’ की लेखिका कैरेन ग्रीनबर्ग कहती हैं, “यातना के इस्तेमाल ने इस मामले को क़ानून और अमेरिकी न्याय व्यवस्था का सम्मान करते हुए सुनवाई के लिए लाना लगभग असंभव कर दिया.”
वह कहती हैं, “इन मामलों में टॉर्चर से मिले सुबूतों के अलावा कोई साक्ष्य देना स्पष्ट रूप से असंभव है. इसके अलावा इन व्यक्तियों को दी गईं यातनाएं अभियोग को और जटिल बना देती हैं.”
यह मामला मिलिट्री कमीशन के तहत भी आता है, जो पारंपरिक अमेरिकी आपराधिक न्याय प्रणाली से अलग नियमों के तहत काम करते हैं और इससे प्रक्रिया धीमी हो जाती है.
लगभग दो साल की वार्ता के बाद पिछले साल गर्मियों में दोष स्वीकार करने की याचिका समझौता हुआ था.